नई दिल्ली, 21 जुलाई । उच्चतम न्यायालय ने पर्यावरण राहत कोष के एक हजार करोड़ रुपये खर्च नहीं होने और निष्क्रिय हालत में पड़े होने का आरोप लगाने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) को नोटिस जारी किया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की प्रशंसा की।
याचिका जबलपुर निवासी सामाजिक कार्यकर्ता ज्ञान प्रकाश ने दायर की है। याचिका में कहा गया है कि पर्यावरण राहत कोष में जमा एक हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि का अब तक उपयोग नहीं किया गया है। याचिका में कहा गया है कि इस राहत कोष का इस्तेमाल सड़क दुर्घटना के पीड़ितों की सहायता के लिए किया जाना चाहिए था।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने केंद्र सरकार की ओऱ से दी गई सूचना का जिक्र करते हुए कहा कि 2020 तक इस कोष में कुल 881 करोड़ रुपये एकत्र किए गए थे, जो बाद में बढ़कर एक हजार करोड़ रुपये से अधिक हो गए।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि राहत कोष योजना 2008 में बनाई गई थी लेकिन इसके तहत अब तक किसी भी लाभार्थी को कोई राशि वितरित नहीं की गई है। जब कोर्ट को ये पता चला कि इस कोष का प्रबंधन केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड कर रहा है, तब कोर्ट ने केंद्र और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव को नोटिस जारी किया।