पर गबन करने तथा दशकों पुराने शिक्षण संस्थान को बंद करने की साजिश जैसे आरोप लगाए।
इसके अलावा संस्था के अधीन संचालित शिक्षण संस्थानों में महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार
के भी आरोप लगाए गए। प्रदर्शन के बाद संघर्ष समिति के प्रतिनिधिमंडल ने अतिरिक्त उपायुक्त
शालिनी चेतल के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम ज्ञापन सौंपा। एडीसी ने
प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि उनकी मांगें प्रधानमंत्री कार्यालय तक भेजी जाएंगी।
धरने को संबोधित करते हुए पूर्व राज्यसभा सांसद
डॉ. सुभाष चंद्रा ने शुक्रवार काे आरोप लगाया कि पिछले 38 वर्षों से एक ही परिवार का संस्था पर कब्जा
बना हुआ है, जिससे स्वामी दयानंद सरस्वती के सिद्धांतों और आर्य समाज की मूल विचारधारा
को नुकसान पहुंचा है। उन्होंने कहा कि यह केवल संपत्ति का मामला नहीं, बल्कि शिक्षा,
सामाजिक मूल्यों और धार्मिक विरासत को बचाने की लड़ाई है। उन्होंने दावा किया कि हिसार
के पांच कॉलेजों के विद्यार्थी भी इस आंदोलन से जुड़ रहे हैं और आने वाले दिनों में
यह आंदोलन व्यापक जनआंदोलन का रूप ले सकता है। पूर्व सरपंच सुमेश ने कहा कि आर्य समाज की संपत्तियां
समाज की धरोहर हैं और इनके साथ किसी भी प्रकार की अनियमितता स्वीकार नहीं की जाएगी।
उन्होंने प्रशासन से तत्काल निष्पक्ष प्रशासक नियुक्त करने की मांग करते हुए चेतावनी
दी कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो ग्रामीण, सामाजिक और किसान संगठन आंदोलन को और
तेज करेंगे।
संघर्ष समिति के सदस्यों ने कहा कि पूरे मामले
से मुख्यमंत्री को पहले भी अवगत कराया जा चुका है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं
हुई। इसी कारण प्रधानमंत्री के हस्तक्षेप की मांग की गई है, ताकि मामले की निष्पक्ष
जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। संघर्ष समिति ने घोषणा की कि यदि उनकी मांगों
पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को अगले चरण में ले जाया जाएगा। इसके लिए
शनिवार शाम 6 बजे आर्य समाज मंदिर परिसर में बैठक बुलाई गई है, जिसमें संघर्ष समिति,
सामाजिक संगठनों, खाप पंचायतों और विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों के प्रतिनिधि आगामी रणनीति
तय करेंगे।