टाइप-1 डायबिटीज प्रबंधन में राजस्थान का ‘मिशन मधुहारी’ बना राष्ट्रीय मॉडल

जयपुर, 31 जुलाई । मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की पहल पर चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा संचालित ‘मिशन मधुहारी’ टाइप-1 डायबिटीज से पीड़ित बच्चों और युवाओं के लिए आधुनिक उपचार, निगरानी और तकनीक आधारित स्वास्थ्य सेवाओं का प्रभावी मॉडल बनकर उभरा है। राज्य सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030 तक टाइप-1 डायबिटीज के कारण किसी भी बच्चे की मृत्यु नहीं होने देना है।

राजस्थान में अनुमानित 53 हजार लोग टाइप-1 डायबिटीज से प्रभावित हैं। इस चुनौती से निपटने के लिए राज्य सरकार ने उपचार, जागरूकता, निगरानी और डिजिटल तकनीक को एकीकृत करते हुए ‘मिशन मधुहारी’ की शुरुआत की। वर्तमान में प्रदेश के 41 जिलों में 120 विशेष टाइप-1 डायबिटीज क्लीनिक संचालित किए जा रहे हैं। आगामी तीन महीनों में 80 नए क्लीनिक भी शुरू किए जाएंगे।

अब तक 2,817 मरीजों का पंजीकरण किया जा चुका है, जिन्हें ‘मिशन मधुहारी’ एप के माध्यम से डिजिटल रूप से ट्रैक किया जा रहा है। इनमें 99 प्रतिशत मरीज बेसल-बोलस इंसुलिन उपचार पद्धति का पालन कर रहे हैं। साथ ही हजारों मरीजों की नियमित HbA1c जांच और सतत फॉलोअप सुनिश्चित किया जा रहा है। मिशन के अनुभवों के आधार पर केंद्र सरकार ने भी विद्यालयों में टाइप-1 डायबिटीज की सक्रिय स्क्रीनिंग को अपने दिशा-निर्देशों में शामिल किया है।

चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने बताया कि मिशन की शुरुआत मार्च 2024 में सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थानों के मूल्यांकन से हुई। इसके बाद जून 2024 में विलियम जे. क्लिंटन फाउंडेशन के सहयोग से जयपुर, जोधपुर, उदयपुर और नागौर में पायलट परियोजना शुरू की गई, जिसे बाद में पूरे प्रदेश में विस्तारित किया गया। उन्होंने बताया कि प्रारंभिक अध्ययन में उपचार प्रणाली में मानकीकरण की कमी, प्रशिक्षित मानव संसाधन का अभाव, इंसुलिन उपलब्धता में असमानता और रेफरल प्रणाली की कमजोरियों जैसी चुनौतियां सामने आई थीं, जिन्हें मिशन के माध्यम से व्यवस्थित रूप से दूर किया गया।

मिशन के तहत मरीजों को इंसुलिन, ग्लूकोमीटर, टेस्ट स्ट्रिप्स, लैंसेट और लॉगबुक निःशुल्क उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इस वर्ष लगभग चार हजार मरीजों के लिए कंटीन्यूअस ग्लूकोज मॉनिटरिंग (सीजीएम) की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। उपचार की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए 500 से अधिक चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है।

मिशन की प्रमुख विशेषताओं में आधुनिक डिजिटल तकनीक का उपयोग भी शामिल है। राजस्थान ‘मधुरूप एआई डिजिटल ट्विन’ तकनीक विकसित करने वाला देश का पहला राज्य बना है। यह प्रणाली मरीजों के स्वास्थ्य आंकड़ों का विश्लेषण कर हाइपो एवं हाइपर ग्लाइसीमिया के जोखिम का पूर्वानुमान लगाने और उपचार संबंधी निर्णय लेने में सहायता करती है। इसके अलावा ‘मधु नेत्र एआई’ के माध्यम से कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित डायबिटिक रेटिनोपैथी स्क्रीनिंग भी शुरू की गई है। यह प्रणाली 90 प्रतिशत से अधिक सटीकता के साथ आंखों की जटिलताओं की प्रारंभिक पहचान करने में सक्षम है और इसे सात जिलों में लागू किया जा चुका है। इस नवाचार को मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार-2026 से सम्मानित किया गया है।

मिशन के अंतर्गत ‘मधुहारी बैंक’ के माध्यम से इंसुलिन और अन्य आवश्यक सामग्रियों की सतत उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। वहीं ‘मधुहारी कैंपस’ पहल के तहत 205 सरकारी विद्यालयों और 41 महाविद्यालयों को टाइप-1 डायबिटीज अनुकूल बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। इसके अलावा ‘मधुरंग’ के माध्यम से मरीजों के बीच संवाद और सामुदायिक सहयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है तथा ‘मधुवाणी’ के जरिए 104 हेल्पलाइन पर चौबीसों घंटे परामर्श सुविधा विकसित की जा रही है।

राज्य सरकार ने मिशन के अंतर्गत क्लीनिकों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए स्वतंत्र एजेंसियों से मूल्यांकन कर प्लैटिनम, गोल्ड और सिल्वर श्रेणी की रैंकिंग व्यवस्था लागू की है। प्रत्येक क्लीनिक में क्यूआर आधारित फीडबैक प्रणाली भी स्थापित की गई है, ताकि मरीजों की प्रतिक्रिया के आधार पर सेवाओं में निरंतर सुधार किया जा सके।

राजस्थान टाइप-1 डायबिटीज से पीड़ित मरीजों के लिए ‘मधुस्माइल वेलबीइंग इंडेक्स’ विकसित करने वाला भी देश का पहला राज्य है। यह मरीजों के भावनात्मक, सामाजिक, शैक्षणिक और आत्म-प्रबंधन से जुड़े पहलुओं का वैज्ञानिक मूल्यांकन करता है। प्रारंभिक अध्ययन में प्रतिभागियों का औसत वेलबीइंग स्कोर 78.9 प्रतिशत दर्ज किया गया, जिसके आधार पर बच्चों और किशोरों के भावनात्मक एवं सामाजिक सहयोग को और अधिक सुदृढ़ करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।

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