एक साल बाद बदली धराली की तस्वीर, आपदा के मलबे से निकलकर फिर रवां हुई जिंदगी

देहरादून, 03 अगस्त । एक साल पहले 05 अगस्त को आई भीषण आपदा ने धराली और आसपास की भागीरथी घाटी को गहरे जख्म दिए थे। कुछ ही पलों में मलबे ने वर्षों की मेहनत को अपनी चपेट में ले लिया। घर-दुकान, खेत-खलिहान, बाग-बगीचे, पशुधन और आजीविका के साधन प्रभावित हुए। चारों ओर मलबा, मायूसी और भविष्य को लेकर अनिश्चितता थी। धराली, हर्षिल और भटवाड़ी एक बार फिर उठ खड़े हुए हैं। सड़कें और दूसरी आधारभूत सुविधाएं बहाल हो रही हैं, खेतों में हरियाली लौट रही है, बाग-बगीचे फिर संवर रहे हैं और स्थानीय अर्थव्यवस्था धीरे-धीरे अपनी पुरानी रफ्तार पकड़ रही है। आपदा से उपजी निराशा की जगह अब पुनर्निर्माण और बेहतर भविष्य का विश्वास दिखाई दे रहा है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार ने आपदा के पहले दिन से ही ‘राहत-बचाव से पुनर्वास और पुनर्वास से पुनर्विकास’ की रणनीति पर काम किया। मुख्यमंत्री ने स्वयं प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया, पीड़ित परिवारों से मिले और राहत एवं पुनर्वास कार्यों की लगातार मॉनिटरिंग की। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि प्रभावितों की सहायता और आधारभूत सुविधाओं की बहाली में किसी भी स्तर पर देरी नहीं होनी चाहिए।

राज्य सरकार के एक प्रवक्ता ने बताया कि पिछले एक वर्ष में सरकार ने भागीरथी घाटी में केवल आपदा से हुई क्षति की भरपाई पर ही ध्यान नहीं दिया, बल्कि लोगों की जिंदगी और स्थानीय अर्थव्यवस्था को दोबारा खड़ा करने के लिए व्यापक स्तर पर काम किया। पशुपालन, सिंचाई, उद्यान, कृषि, खंड विकास, ऊर्जा, पर्यटन, लोक निर्माण तथा खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति सहित विभिन्न विभागों के माध्यम से ₹16 करोड़ से अधिक के विकास एवं पुनर्वास कार्य किए गए। इसके अतिरिक्त प्रभावित परिवारों को अलग-अलग मदों में ₹17 करोड़ से अधिक की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई गई। यानी बीते एक वर्ष में 33 करोड़ से अधिक के विकास, पुनर्वास और आर्थिक सहायता के कार्यों के माध्यम से प्रभावित क्षेत्र और परिवारों को संबल प्रदान किया गया।

सिर्फ सड़क-मकान नहीं, आजीविका भी दोबारा खड़ी की

राज्य सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि आपदा में कई परिवारों के सामने सबसे बड़ी चुनौती आजीविका की थी। किसी के बाग-बगीचे उजड़े थे तो किसी की फसल, पशुधन या कारोबार प्रभावित हुआ था। सरकार ने इसी जरूरत को समझते हुए पुनर्वास को केवल निर्माण कार्यों तक सीमित नहीं रखा। बकरी एवं भेड़ पालन को प्रोत्साहन, उद्यानों की क्षति पर प्रतिपूर्ति, किसानों को फसल एवं पौध वितरण तथा कृषि गतिविधियों को पुनर्जीवित करने के लिए सहायता दी गई। सिंचाई व्यवस्था की बहाली के साथ पेयजल और विद्युत लाइनों को दुरुस्त करने का काम भी तेजी से किया गया।क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत और पुनर्निर्माण को प्राथमिकता दी गई। साथ ही नदी किनारे बाढ़ सुरक्षात्मक कार्यों को आगे बढ़ाया गया, ताकि पुनर्निर्माण के साथ क्षेत्र को भविष्य की संभावित आपदाओं के प्रति अधिक सुरक्षित बनाया जा सके। भागीरथी घाटी की अर्थव्यवस्था में पर्यटन की महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए पर्यटन गतिविधियों को पुनर्जीवित करने पर भी विशेष जोर दिया गया, ताकि स्थानीय कारोबार और रोजगार फिर से गति पकड़ सकें।

हर कदम पर प्रभावितों के साथ सरकार

आपदा के तत्काल बाद राहत एवं बचाव से शुरू हुआ सरकार का अभियान मुआवजा और पुनर्वास होते हुए अब पुनर्विकास तक पहुंच चुका है। मुख्यमंत्री ने समय-समय पर कार्यों की समीक्षा कर अधिकारियों को स्पष्ट किया कि पुनर्निर्माण का उद्देश्य केवल पुरानी व्यवस्था बहाल करना नहीं, बल्कि क्षेत्र को पहले से अधिक सुरक्षित और सक्षम बनाना होना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा, “धराली की आपदा हमारे लिए केवल पुनर्निर्माण की चुनौती नहीं थी, बल्कि प्रभावित परिवारों के जीवन और भविष्य को फिर से संवारने का दायित्व भी था। हमारी सरकार पहले दिन से प्रत्येक प्रभावित परिवार के साथ मजबूती से खड़ी है। हमारा संकल्प है कि भागीरथी घाटी को पहले से अधिक सुरक्षित, सशक्त और समृद्ध बनाया जाए। पुनर्वास और पुनर्निर्माण के कार्य पूरी प्रतिबद्धता के साथ आगे भी जारी रहेंगे।

धराली की कहानी अब आपदा की नहीं, पुनरुत्थान की है

एक वर्ष पहले जिस धराली की तस्वीरों ने पूरे देश को व्यथित किया था, आज वही धराली अपने साहस और पुनर्निर्माण से नई उम्मीद जगा रही है।मलबे से रास्ते निकले हैं, उजड़े बाग फिर संवर रहे हैं और जिंदगी दोबारा रफ्तार पकड़ रही है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *