जयपुर, 28 जुलाई । अतिरिक्त मुख्य महानगर मजिस्ट्रेट क्रम 10 महानगर प्रथम ने मानसरोवर स्थित नीरजा मोदी स्कूल की कक्षा 4 की 9 वर्षीय छात्रा अमायरा की आत्महत्या से जुड़े मामले में पुलिस की ओर से पेश एफआईआर पर प्रसंज्ञान ले लिया है। इसके साथ ही अदालत ने आरोपियों को जमानत का लाभ दे दिया है। वहीं अदालत ने पीडित पक्ष की ओर से मामले में उकसाने की धारा जोडने के लिए पेश प्रार्थना पत्र के साथ पूरे प्रकरण को सुनवाई के लिए बाल न्यायालय, डीजे कोर्ट में भेज दिया है, जहां 31 जुलाई को सुनवाई होगी।
गौरतलब है कि पुलिस ने अनुसंधान के बाद किशोर न्याय अधिनियम की धारा 75 के साथ-साथ भारतीय न्याय संहिता की धारा 106(1) और धारा 238(सी) के तहत अपराध प्रमाणित मानकर अदालत में चालान पेश किया था। इस पूरे प्रकरण में स्कूल संचालक सौरभ मोदी, प्रिंसिपल इंदु दुबे, क्लास टीचर पुनीता शर्मा और सफाईकर्मी रामू को आरोपी बनाया गया है। सुनवाई के दौरान पीडित पक्ष की ओर से कहा गया कि स्कूल में अमायरा को बुली किया जा रहा था और इसकी शिकायत करने पर क्लास टीचर ने उस पर कोई एक्शन नहीं लिया। जिसके चलते उसने आहत होकर आत्महत्या कर ली। इसके बाद साक्ष्य मिटाने के लिए घटना स्थल को पानी से साफ कर दिया गया। पीडित पक्ष की ओर से प्रार्थना पत्र पेश कर कहा गया कि मामले में पुलिस ने आरोप पत्र में आरोपियों पर उकसाने की धारा नहीं लगाई है। ऐसे में यह धारा भी इसमें जोडी जाए। जिसका विरोध करते हुए बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक राज बाजवा व अधिवक्ता स्नेहदीप ने कहा कि मामले में किशोर न्याय अधिनियम के तहत आरोप लगाए गए हैं। जिस पर सुनवाई करने का इस अदालत को अधिकार नहीं है। इसके अलावा अन्य जो धाराएं लगाई गई हैं, वह आरोप भी आरोपियों पर साबित नहीं होते हैं। आरोपियों की ओर से ऐसा कोई कृत्य या लापरवाही नहीं कि गई, जिससे अमायरा के पास आत्महत्या करने का ही विकल्प बचा हो। वहीं इस अदालत को अपने स्तर पर अलग से धाराएं शामिल करने का अधिकार नहीं है। गौरतलब है कि पिछले साल 1 नवंबर को नीरजा मोदी स्कूल में पढऩे वाली नौ साल की मासूम ने स्कूल की चौथी मंजिल से कूदकर आत्महत्या कर ली थी। घटना का लाइव फुटेज भी सामने आया था।