विदेशी दंपती ने दिया ‘गोद लेने’ का झांसा, शिमला के व्यक्ति से 11 लाख रुपये की ठगी, एफआईआर

शिमला, 18 जुलाई । “हमारी कोई संतान नहीं है, तुम हमारे बेटे बन जाओ।” फोन पर कही गई यह बात शिमला जिले के नेरवा क्षेत्र के एक व्यक्ति के लिए भरोसे की शुरुआत बनी, लेकिन कुछ ही समय में यही भरोसा करीब 11 लाख रुपये की ठगी में बदल गया। दरअसल, खुद को इटली में रहने वाला निःसंतान दंपती बताने वाले लोगों ने पहले अपनापन दिखाया, फिर अपनी पूरी संपत्ति का वारिस बनाने का लालच दिया। इसके बाद भारत आने और सीबीआई की गिरफ्त में फंसने की कहानी सुनाकर शिकायतकर्ता से लाखों रुपये अपने खातों में जमा करा लिए। जब सच्चाई सामने आई तो पीड़ित ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

पुलिस के अनुसार इस मामले में नेरवा थाना में एफआईआर दर्ज की गई है। मामला भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं 319(2), 318(4) और 61(2) के तहत दर्ज किया गया है। शिकायत अमर सिंह पुत्र हरि सिंह निवासी नेरवा जिला शिमला ने दर्ज करवाई है। शिकायतकर्ता ने पुलिस को बताया कि उसे दो अलग-अलग मोबाइल नंबर से फोन कॉल आई थीं। फोन करने वाले खुद को इटली में रहने वाला पति-पत्नी बताते थे।

शिकायत के अनुसार दोनों ने कहा कि उनकी कोई संतान नहीं है और उनके पास इटली की बड़ी मात्रा में मुद्रा और काफी संपत्ति है। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति उनकी देखभाल करेगा, वही उनकी पूरी संपत्ति का उत्तराधिकारी बनेगा। इसी दौरान उन्होंने शिकायतकर्ता को अपना बेटा बनाने और गोद लेने की बात कही। उन्होंने यह भी बताया कि वे भारत आ रहे हैं। लगातार बातचीत होने से शिकायतकर्ता को उनकी बातों पर भरोसा हो गया।

कुछ समय बाद शिकायतकर्ता को फिर फोन आया। इस बार बताया गया कि इटली से आया दंपती भारत पहुंच चुका है, लेकिन उसे केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने रोक लिया है। फोन करने वालों ने दावा किया कि उन्हें छुड़ाने के लिए पैसे जमा कराने होंगे। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इसी बहाने उससे अलग-अलग समय पर रकम मांगी गई। दंपती की मदद करने और बाद में उनकी संपत्ति मिलने की उम्मीद में उसने करीब 11 लाख रुपये भेज दिए। बाद में उसे पता चला कि पूरा घटनाक्रम एक सुनियोजित धोखाधड़ी थी और उसे झूठी कहानी सुनाकर ठगा गया है।

शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि जिन मोबाइल नंबरों से शिकायतकर्ता से संपर्क किया गया, उनका इस्तेमाल किसने किया। साथ ही ठगी की रकम किन खातों या माध्यमों से भेजी गई और इस पूरे नेटवर्क में कितने लोग शामिल हैं, इसकी भी जांच की जा रही है। मामले की जांच स्वयं थाना प्रभारी कर रहे हैं।

पुलिस के एक अधिकारी ने शनिवार को बताया कि साइबर ठग अब लोगों का विश्वास जीतने के लिए भावनात्मक कहानियों का सहारा ले रहे हैं। कभी नौकरी, कभी निवेश, कभी लॉटरी और अब गोद लेने तथा विदेशी संपत्ति का लालच देकर लोगों को निशाना बनाया जा रहा है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान व्यक्ति की ऐसी बातों पर भरोसा करने से पहले पूरी तरह जांच-पड़ताल करें और पैसे भेजने से पहले संबंधित एजेंसियों से जानकारी जरूर लें।

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