नई दिल्ली, 29 जुलाई । आम आदमी पार्टी (आआपा) ने आगामी 7 से 11 अगस्त तक आयोजित होने वाले विधानसभा सत्र में प्रश्नकाल का प्रावधान नहीं रखने पर सवाल खड़ा किया है। आआपा के बुराड़ी से विधायक संजीव झा ने विधानसभा अध्यक्ष से अपील करते हुए कहा कि बिना प्रश्नकाल के सदन की बैठक न होने दें। अगर समय बढ़ाना चाहें तो इसके लिए विपक्ष तैयार है।
संजीव झा ने बुधवार को पार्टी मुख्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में कहा कि सरकार ने यह निर्णय लिया है कि 7 से 11 अगस्त तक विधानसभा का सत्र बुलाएगी। लगातार यह दूसरा सत्र है, जिसमें प्रश्न काल नहीं रखा गया है। उन्होंने कहा कि आज 29 जुलाई है और 7 अगस्त से सत्र शुरू करना है। सामान्यतः अगर प्रश्न काल रखना होता है, तो 15 दिन का अंतर रहता है ताकि प्रश्न लगाए जा सकें, उनके जवाब आएं और फिर उन्हें विधानसभा पटल पर रखा जाए। तो अगर प्रश्न काल नहीं रखा जा रहा है, तो फिर इस सत्र का मतलब क्या है?
संजीव झा ने कहा कि दिल्ली सरकार ने दिल्ली के लोगों से जो वादे किए थे, उन पर कोई काम नहीं हो रहा है। अभी 650 करोड़ रुपये का घोटाला सामने आया है, क्या सरकार इस जिम्मेदारी से बचना चाहती है कि लोगों के सामने यह जानकारी न आए।
संजीव झा ने कहा कि दिल्ली विधानसभा ही एक ऐसी जगह है, जहां सरकार की जिम्मेदारी और जवाबदेही दोनों तय होती हैं। सरकार सदन के लिए जिम्मेदार और जवाबदेह दोनों है और वह जवाबदेही तभी तय होगी जब प्रश्न काल रखा जाएगा और सवाल किए जाएंगे। अगर प्रश्न काल नहीं रखा जाता है, तो इस व्यवस्था का कोई मतलब नहीं रह जाता और किसी अधिकारी की कोई जिम्मेदारी तय नहीं होती।
संजीव झा ने आआपा की तरफ से विधानसभा अध्यक्ष के सामने मांग रखी है कि बिना प्रश्न काल के सदन की बैठक नहीं होनी चाहिए।
कोंडली विधायक कुलदीप कुमार ने कहा कि दिल्ली विधानसभा सदन एक ही ऐसी जगह है, जहां सरकार को अपनी जवाबदेही देनी पड़ती है। कुलदीप कुमार ने कहा कि यह सरकार लगातार विधानसभा सत्रों से भाग रही है, आज डेढ़ साल से ज्यादा इनकी सरकार को हो गए हैं, आखिर कब तक ये जवाबदेही से भागेंगे?
किराड़ी विधायक अनिल झा ने कहा कि विपक्ष के विधायक सदन में प्रश्न करना चाहते हैं। अनिल झा ने कहा कि विश्व के किसी लोकतांत्रिक देश में ऐसा नहीं होता कि विपक्ष का विधायक सवाल न कर सके। उन्होंने कहा कि दिल्ली के लोगों को इस पर गंभीरता से विचार करना पड़ेगा कि आखिर जनता ने विपक्ष के विधायकों को चुनकर क्यों भेजा है?