नई दिल्ली, 28 जुलाई । सार्वजनिक क्षेत्र की महारत्न गेल (इंडिया) लिमिटेड और राष्ट्रीय केमिकल्स एंड फर्टिलाइजर्स लिमिटेड (आरसीएफ) ने महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में गैस आधारित उर्वरक संयंत्र स्थापित करने के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस परियोजना की नियोजित क्षमता 1.27 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष (एमएमटीपीए) यूरिया उत्पादन की है।
गेल ने बुधवार को जारी बयान में कहा कि एक विशेष प्रयोजन इकाई (एसपीवी) के जरिए महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में संयुक्त रूप से गैस आधारित उर्वरक परियोजना स्थापित करने के लिए गेल इंडिया लिमिटेड और आरसीएफ ने एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते के अंतर्गत 1.27 मिलियन मीट्रिक टन सालाना (एमएमटीपीए) की नियोजित क्षमता के साथ यूरिया उत्पादन सुविधा को गेल की मुंबई-नागपुर-झारसुगुड़ा प्राकृतिक गैस पाइपलाइन (एमएनजेपीएल) के साथ महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में स्थापित करने की परिकल्पना की गई है।
इस समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर गेल के कार्यकारी निदेशक (व्यापार विकास और स्टार्ट-अप) संजय अग्रवाल और आरसीएफ की कार्यकारी निदेशक (परियोजना, कॉर्पोरेट और समन्वय) ज्योति पाटिल ने इस समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर गेल के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक दीपक गुप्ता और आरसीएफ के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक एस. शिवकुमार भी उपस्थित थे। इस दौरान दोनों कंपनियों के वरिष्ठ प्रबंधन, गेल के निदेशक (बीडी) आर. के. सिंघल, आरसीएफ के निदेशक (वित्त) नझहत जे. शेख और निदेशक (तकनीकी) और रितु गोस्वामी उपस्थित थे।
गेल (इंडिया) लिमिटेड के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक दीपक गुप्ता ने अपने संबोधन में कहा, “प्रस्तावित उर्वरक परियोजना प्राकृतिक गैस के उपयोग के जरिए दीर्घकालिक मूल्य सृजित करने और भारत के ऊर्जा सुरक्षा उद्देश्यों में योगदान देने की गेल की रणनीति के अनुरूप है। हम आरसीएफ के साथ साझेदारी करने में प्रसन्न्ता हो रही है, जो इस क्षेत्र में सिद्ध विशेषज्ञता वाली एक अग्रणी उर्वरक कंपनी है।
आरसीएफ के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक एस. शिवकुमार ने कहा कि “आरसीएफ को महाराष्ट्र में इस महत्वपूर्ण गैस आधारित उर्वरक परियोजना के विकास के लिए गेल के साथ सहयोग करके प्रसन्नता हो रही है। उन्होंने बताया कि प्रस्तावित परियोजना से देश में बढ़ती उर्वरक मांग को पूरा करने, आयात की निर्भरता कम करने और महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण योगदान मिलने की उम्मीद है।